
शाह की मौजूदगी में सरकार और संगठन एक मंच पर दिखी, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ। सीएम पुष्कर धामी की खुले मन से तारीफ की, जिससे अंदरूनी कलह पर कहीं न कहीं विराम लगेगा। वहीं, विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया, जिससे सभी को चुनावी मोड में आने का संदेश मिला।
शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों त्रिवेंद्र, निशंक, बहुगुणा और तीरथ के नाम लेने के बाद सांसदों के नाम लिए, जिसमें गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को अपना मित्र भी बताया। पूर्व मुख्यमंत्रियों और वर्तमान नेतृत्व को एक ही फ्रेम में लाकर भाजपा ने यह संदेश दिया कि पार्टी के भीतर कोई गुटबाजी नहीं है।
धर्मनगरी से हिंदू वोटबैंक की एकजुटता
शाह ने केवल भविष्य के वादे नहीं किए बल्कि नौ साल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा भी रखा। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और केदारनाथ पुनर्निर्माण जैसे प्रोजेक्ट्स को अपनी मुख्य ढाल बनाया। वहीं, हरिद्वार पवित्र धर्मनगरी से विकास और संस्कृति के मेल को हिंदू वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास भी किया।